Jain Stotra
13. Vairagya Shatak | वैराग्य शतक
अडकम्मपासबद्धो ,
जीवो संसारचारए ठाई ।
अडकम्मपासमुक्को ,
आया सिवमंदिरे ठाइ ॥१३ ॥
:अर्थ:
आठ कर्म रूपी पाश से बँधा हुआ जीव संसार की कैद में रहता है और आठ कर्म के नाश से मुक्त हुआ जीव मोक्ष में जाता है ।। 13 ।।




