Jain Stotra
16. Vairagya Shatak | वैराग्य शतक
घण कम्म पास बद्धो ,
भवनयर चउप्पहेसु विविहाओ ।
पावइ विडंबणाओ ,
जीवो को इत्थ सरणं से ॥१६ ॥
: अर्थ :
गाद कर्म रुपी पाश से बँधा हुआ जीव इस संसार रूपी नगर की चार गति रुप मार्ग में अनेक प्रकार की विडंबना प्राप्त करता है , यहाँ उसको शरण देनेवाला कौन है ? ।।16।।




