Jain Stotra
17. Vairagya Shatak | वैराग्य शतक
घोरंमि गब्भवासे ,
कमलमलजंबालअसुइ बीभच्छे ।
वसिओ अणंतखुत्तो ,
जीवो कम्माणु भावेण ॥१७ ॥
: अर्थ :
कर्म के प्रभाव से यह जीव वीर्य और मल रुपी कीचड़ की अशुचि से भयानक ऐसे गर्भावास में अनंतीबार रहा है ।।17 ।।
ॐह्रींश्रींमहावीरस्वामिनेनमः
Om Hreem Shreem Mahaveer Swamine Namah
ॐह्रींश्रींमहावीरस्वामिनेनमः
Jain Stotra
घोरंमि गब्भवासे ,
कमलमलजंबालअसुइ बीभच्छे ।
वसिओ अणंतखुत्तो ,
जीवो कम्माणु भावेण ॥१७ ॥
: अर्थ :
कर्म के प्रभाव से यह जीव वीर्य और मल रुपी कीचड़ की अशुचि से भयानक ऐसे गर्भावास में अनंतीबार रहा है ।।17 ।।