Jain Stotra
3. Vairagya Shatak | वैराग्य शतक
जं कल्ले कायव्वं ,
तं अज्जं चिय करेह तुरमाणा ।
बहुविग्घो हु मुहुत्तो ,
मा अवरण्हं पडिक्खेह ॥३ ॥
: अथॅ :
जो धर्मकार्य कल करने योग्य है , उसे आज ही शीघ्र कर लो । मुहुर्त ( काल ) अनेक विघ्नों से भरा हुआ है , अतः अपराह्र पर मत डालो ।।3।।




