Jain Stotra
31. Vairagya Shatak | वैराग्य शतक
कह आयं कह चलियं ,
तुमं पि कह आगओ कहं गमिही ।
अन्नुन्नं पि न याणह ,
जीव ! कुडुंबं कओ तुज्झ ? ॥३१ ॥
: अर्थ :
हे आत्मा ! यह कुटुंब कहाँ से आया और कहाँ जाएगा ? तू भी कहाँ से आया और कहाँ जाएगा ? तुम दोनों परस्पर यह जानते नहीं हो तो यह कुटुंब तुम्हारा कहाँ से ? ।।31।।




